अंतरिक्ष में उड़ान, दोस्ती ज़मीन पर कायम: Group Captain Shubhanshu Shukla और उनके मेंटर की खास कहानी

Bhiju Nath

“तू सोच भी नहीं सकता, क्या हुआ है”

जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अमेरिकी नेतृत्व वाली Axiom-4 अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया, तो उन्होंने सबसे पहले अपने दोस्त, मेंटर और खगोल-फोटोग्राफी साथी अलोक कुमार को फोन किया। उनके पहले शब्द थे — “You will not be able to guess what just happened.” मगर प्रोफेसर अलोक कुमार पहले ही समझ चुके थे कि उनके शिष्य का सपना पूरा हो गया है।

मेंटर, दोस्त और ‘जय-वीरू’ की जोड़ी

शुक्ला और अलोक कुमार की मुलाकात IISc बेंगलुरु में हुई थी, जब शुक्ला भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की ट्रेनिंग ले रहे थे। दोनों की दोस्ती सितारों और ग्रहों को लेकर जिज्ञासा से शुरू हुई — और धीरे-धीरे दोनों IISc में “जय और वीरू” के नाम से मशहूर हो गए। साथ मिलकर COVID-19 लॉकडाउन के दौरान ये दोनों रातों को आसमान निहारते, और जीवन से परे की संभावनाओं पर चर्चा करते।

अधूरी थीसिस और बड़ा सपना

अंतरिक्ष उड़ान से पहले शुक्ला ने IISc में मास्टर्स में दाखिला लिया था, लेकिन Axiom मिशन की ट्रेनिंग के लिए उन्हें अपनी थीसिस अधूरी छोड़नी पड़ी। अब उनके मेंटर प्रो. कुमार का कहना है — “जैसे ही वो वापस आएगा, मैं उसकी अधूरी थीसिस जरूर पूरी करवाऊंगा।”

स्पेस में बस्तियां बसाने की तैयारी

‘शक्स’ — जैसा कि प्रोफेसर कुमार उन्हें पुकारते हैं — का रिसर्च स्पेस हैबिटेशन पर केंद्रित है। उनका काम चंद्रमा और मंगल की मिट्टी (रेगोलिथ) से इमारतें बनाने की संभावनाओं पर आधारित है। IISc की लैब में उन्होंने और उनकी टीम ने स्पेस ब्रिक्स बनाए हैं, जिनमें बैक्टीरिया और यूरिया का प्रयोग होता है। शुक्ला का रिसर्च खास तौर पर इस पर केंद्रित है कि Sporosarcina pasteurii नामक बैक्टीरिया मंगल की ज़मीन में पाए जाने वाले पर्क्लोरेट्स के साथ कैसे प्रतिक्रिया करता है — जिससे मंगल पर घर बनाने में मदद मिल सकती है।

‘शक्स’ के लिए 1.4 अरब लोगों की दुआएं

Axiom-4 के लॉन्च के समय प्रो. कुमार ने IISc कैंपस में अपने सहयोगियों के साथ टीवी पर यह ऐतिहासिक क्षण देखा। उनका चेहरा गर्व से चमक रहा था। उन्होंने कहा, “शुभांशु केवल अंतरिक्ष में उड़ान नहीं भर रहा, वह 1.4 अरब भारतीयों की उम्मीदें और सपने भी अपने साथ ले जा रहा है।”