तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में दो स्कूली बच्चों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए जब उनकी स्कूल वैन एक पैसेंजर ट्रेन से टकरा गई। यह टक्कर सुबह करीब 7:45 AM कड्डालोर और अलप्पाक्कम के बीच स्थित एक ‘नॉन-इंटरलॉक्ड मैनड गेट’ रेलवे लेवल क्रॉसिंग पर हुई, जब विल्लुपुरम-मयिलाडुथुराई पैसेंजर ट्रेन उस रास्ते से गुजर रही थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूल वैन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। अधिकारियों ने बताया कि जिस गेट से हादसा हुआ, वहां गेटमैन ने गेट बंद करना शुरू कर दिया था, लेकिन वैन चालक ने जबरन गेट पार करने की कोशिश की, जो नियमों के खिलाफ था। रेलवे के अनुसार, यह वैन को गेट पार करने देने का मामला नहीं था और गेटमैन की इस गलती के लिए उसे निलंबित कर दिया गया है। रेलवे ने बताया कि हादसे की जांच के लिए सुरक्षा, संचालन और इंजीनियरिंग शाखा के अधिकारियों की एक समिति गठित कर दी गई है जो घटना की विस्तृत जांच करेगी।
रेलवे ने किया मुआवजे का ऐलान
इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को रेलवे की ओर से 5 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। वहीं जिन छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं, उन्हें 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राहत राशि हादसे के पीड़ितों के लिए थोड़ी राहत जरूर दे सकती है, लेकिन इस घटना ने रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों में गुस्सा, स्कूल वाहनों की सुरक्षा पर चिंता
हादसे के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि स्कूली बच्चों को लेकर जा रहे वाहनों के लिए रेलवे क्रॉसिंग पर कोई विशेष सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं होते। कई लोगों ने मांग की कि ऐसी क्रॉसिंग्स पर चौकसी और सख्ती बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे दोबारा न हों।
सवालों के घेरे में स्कूल प्रशासन और चालक की भूमिका
हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर स्कूल प्रशासन ने एक अनट्रेंड ड्राइवर को कैसे ज़िम्मेदारी दी? अगर गेट बंद किया जा रहा था, तो ड्राइवर ने क्यों जबरन क्रॉस करने की कोशिश की? प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि चालक की जल्दबाजी ने मासूमों की जान ले ली।
जरूरत है ठोस कदम उठाने की
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि एक चेतावनी है — स्कूल वाहनों के संचालन में कोई भी लापरवाही सीधे बच्चों की जान जोखिम में डालती है। अब वक्त आ गया है जब रेलवे और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसे क्रॉसिंग्स पर स्वचालित गेट, CCTV और सख्त नियम लागू करने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने बच्चों की लाशों को कंधा न देना पड़े।
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